Friday, 18 May 2012

असफल सेक्स का कारणः

कुछ स्त्री-पुरुषों के लिए सेक्स करना असंभव क्यों हो जाता है? ऐसे व्यक्ति जो न तो नपुंसक होते हैं और नहीं उनमें सेक्स की पाबंदी होती है फिर भी वे सेक्स संबंधी दुर्बलता का अनुभव क्यों करते हैं और संभोग कार्य में पूर्ण आनन्द लेने या देने में असमर्थ क्यों रहते हैं?

कुछ लोगों में इस तरह के सवाल हमेशा बने रहते हैं कि आखिर क्या कारण है कि मैं सेक्स नहीं कर पाता और सेक्स का सही आनन्द नहीं ले पाता। इस तरह के सवाल मन में उत्पन्न होने पर व्यक्ति अक्सर अपने किसी भी शारीरिक कमजोरी को उसका कारण मानने लगते हैं। कुछ लोग तो अपने मोटापे को ही नपुंसकता का कारण मान लेते हैं। मोटापे से परेशान व्यक्ति हमेशा यह सोचता रहता है कि मोटापे और सेक्स के बीच जरूर कोई न कोई संबंध हैं। ऐसे में यदि मोटापा कम हो जाए और शरीर का वजन सामान्य हो जाए तो मुझे नपुंसकता की परेशानी से छुटकारा मिल सकता है।

सेक्स विशेषज्ञों के अनुसार व्यक्ति में सेक्स की असफलता या दुर्बलता का कारण यदि कोई रोग हो तो उस रोग के समाप्त होने पर नपुंसकता अर्थात सेक्स की कमजोरी अपने आप समाप्त हो जाती है। लेकिन मनोविशेषज्ञों का कहना है कि अधिकतर नपुंसकता या सेक्स में असफलता का कारण मानसिक होता है। सेक्स में असफलता का शारीरिक कारण बहुत ही कम होता है।

सेक्स संबंधों के बारे में सेक्स विज्ञान का कहना है कि स्त्री-पुरुष दोनों में सेक्स के प्रति उत्तेजना दो प्रकार से पैदा की जा सकती है- पहला मस्तिष्क के द्वारा जहां सेक्स के लिए उत्तेजना पैदा करने वाले हार्मोन होते हैं। मस्तिष्क के इस भाग को क्रियाशील बनाकर सेक्स हार्मोन के स्राव को तेज करके स्त्री-पुरुष के मन में उत्तेजना पैदा की जा सकती है। दूसरा कामुक अंगों को छूकर, आलिंगन और चुंबन के द्वारा मन में उत्तेजना पैदा की जा सकती है। इस तरह सेक्स के प्रति मानसिक उत्तेजना में बाधा तब आती है जब कोई बाहरी कारण से मानसिक तनाव उत्पन्न होता है। सेक्स के प्रति उत्तेजना में बाधा शारीरिक कारण से भी हो सकता है, जैसे किसी रोग आदि के कारण।

नपुंसकता क्या है? नपुंसकता का अर्थ है संभोग अर्थात सेक्स करने की क्षमता का समाप्त होना या कम होना। नपुंसकता से पीड़ित रोगी के लिंग में सेक्स के समय तनाव व कड़ापन नहीं आ पाता जिससे उसे सेक्स का सही आनन्द नहीं मिल पाता और न हीं वह स्त्री को ही सेक्स से संतुष्ट कर पाता है जो स्त्रियां सेक्स का पूर्ण आनन्द नहीं ले पाती हैं अथवा सेक्स में रुचि नहीं रखती है वह ठंडी स्त्रियां कहलाती हैं। ऐसी स्त्रियां संतान उत्पन्न करने में असमर्थ होती हैं। वे स्त्री-पुरुष जो संतान उत्पन्न करने में असमर्थ होते हैं उन्हें बांझ (बंध्या) कहते हैं।

आमतौर पर सभी लोग यही जानते हैं कि केवल स्त्रियां ही बांझ होती हैं लेकिन वे यह नहीं जानते कि पुरुष भी बांझ होते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि स्त्री-पुरुष दोनों में से कोई भी बांझ हो सकता है। पुरुष में सेक्स आनन्द प्राप्त करने की क्षमता होने के बाद भी वह बांझ हो सकता है। यदि विवाह के कुछ सालों बाद तक स्त्री गर्भवती नहीं होती और कोई बच्चा जन्म नहीं लेता है तो घर वाले यह समझ लेते हैं कि स्त्री बांझ है। इस तरह की भावनाओं का मुख्य कारण यह है, पुरुष द्वारा सेक्स संबंधों के लिए भरपूर प्रदर्शन करना। इस तरह के प्रदर्शन से घर वाले समझ बैठते हैं कि पुरुष में संतान उत्पन्न करने की क्षमता है जबकि स्त्री में संतान उत्पन्न करने की क्षमता नहीं होती है। स्त्री के विषय में इस तरह की भावना रखना बेहद गलत है कि केवल स्त्री ही बांझ हो सकती है।

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